पंकज भूषण का जन्म मुजफ्फरपुर में एक शिक्षक परिवार में हुआ. बचपन से ही इन्हें देश भ्रमण करने का शौक था. जहाँ भी जाते कुछ न कुछ सीखते. वहाँ का रहन-सहन, जीवन-यापन, सोच-विचार, संस्कार-पहनावा, भोजन-पानी, मान्यताएं आदि. लोगों की मदद करने के लिए हमेशा आगे आना, समाज को साथ लेकर चलना, महिलाओं-बच्चे-बुजुर्ग के लिए खास तौर पर काम करने की प्रेरणा इन्हें विरासत में मिली है. ये कहते हैं विपरीत परिस्थितियाँ क्या होती हैं! हर परिस्थिति में इंसान को अपना कार्य करना चाहिए और खुश रहना चाहिए. दूसरों को कोसने के बजाय आगे देखना चाहिये, आगे बढ़ना चाहिए. गलती भी हो गयी तो माथा ठोकते रहने के बजाय आगे संभल कर चलने का प्रण ले कर आगे बढ़ना चाहिए. भारतीय वायु सेना में भी इन्होने कार्य किया है.

पंकज भूषण एक कुशल संचालक भी हैं. कोसी बाढ़ में इन्होनें अपने दम पर हजारों लोगों के जानें बचाईं, उनके रहने की सुविधाएं मुहैया करवायी, साफ़ पानी की व्यवस्था करवाई. इनके काम की जानकारी मिलने पर कई बड़ी संस्थाओं नें इनके साथ मिलकर आपदा प्रबंधन में लोगों की मदद की. गरीबों, अपाहिजों, बाल मजदूरों, शोषित महिलाओं के लिए तो ये हर पल कार्यरत रहते हैं.

ईश्वर में विश्वास रखने वाले, योग करने वाले, हर जगह साफ़-सफाई का ध्यान रखने वाले पंकज भूषण ने २००२ में सामान सोच रखने वाले लोगों के साथ मिलकर ‘तारा फ़ाउंडेशन’ नामक गैर-सरकारी संगठन की स्थापना की. अभी हाल ही जी-एम फूड्स की खेती और व्यापार के खिलाफ पूरे देश में जो लहर चली उसमें पंकज भूषण की अहम भूमिका थी. तुरंत ‘जी-एम फ्री बिहार मूवमेंट’ का गठन कर इन्होने बिहार के अलावा देश के कई भागों में अपनी टीम के साथ दौड़ा करके हर जगह किसानों, आम नागरिकों एवं सरकार के समक्ष सच्चाई सामने रखी और नतीजतन सरकार को बीटी बैगन के मामले में झुकना ही पड़ा. इनके इस अभियान में बिहार की जनता ने खुल कर इनका साथ दिया. ये कहते हैं की किसी भी मुद्दे पर अगर जनता एक रहे, एक स्वर में बात करे तो बिहार की तस्वीर ही बदल जायेगी. “आप मेरा नाम नहीं, सिर्फ काम के बारे में लिखिए. लोगों तक सच्ची खबर, उनसे जुडे समाचार पहुँचाइये ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिल सके. उन्हे पता चले हमारे बिहार में क्या हो रहा है.”

पंकज भूषण कहते हैं वह तो अभी राही हैं, और उन्हे अभी बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों के लिए काफी कुछ करना हैं, बिहार में पूर्ण साक्षरता लानी है. औद्योगिक घरानों को राज्य में उद्योग लगाने की लिए, रोजगार देने के लिए प्रेरित करना है.

आज देश में बहुराष्ट्रीय बीज कंपनियां हमारे खेतों पर कब्ज़ा करके देश को गुलाम बनाने की साजिश कर रहीं हैं,श्री भूषण ने उनके विरुद्ध युद्ध छेड दिया है. भूषण कहते हैं की आज अमेरिका में विचार होता है की हमारे खेतों में कौन सा बीज लगेगा. इन्होने जैविक कृषि को भी अंजाम दिया है और सरकार के साथ प्रदेश में जैविक खेती की जानकारी भी किसानों तक पहुंचा रहे हैं.

2 Responses to “About”


  1. 1 GM Free Bihar movement January 31, 2012 at 2:31 pm

    Thanks Pari. Really its great. Go ahead. Wish you all the best.

  2. 2 pari January 30, 2012 at 6:00 pm

    Respected Sir/ Madam

    Gandhi’s Martyrdom day celebrated with a thought for safe food

    New Delhi, 30 January, 2012: On the martyrdom anniversary of Mahatma Gandhi, Delhiites gathered at Dilli Haat to reflect on his philosophy of Swaraj and safe food. In the wake of the growing unrest about Genetically Modified (GM) crops and the issues surrounding the controversial Biotechnology Authority of India (BRAI) Bill, a street-play was performed at the venue that looked into the dangerous implications of GM CROPS if the BRAI bill is introduced in the parliament this time.

    The event also saw eminent food activist, Ajay Mahajan from Beej Bachao Andolan take the centre and discuss the issue of safe food with the concerned citizens. He opined that “the BRAI bill is anti-Gandhi in nature and against the Swaraj movement as the bill will ensure that the foreign Biotech companies shall gain a monopoly over our local agriculture if passed in the parliament.” The speech was followed by the display of a massive public art that read ‘We say NO to BRAI bill’.

    To protect the food safety and biodiversity of the country, Greenpeace believes that the government should stop the tabling of the Biotechnology Regulatory Authority of India Bill 2011 (Draft), which will form a single-clearance window for GM crops in India and instead promote sustainable, ecological agriculture.

    खाद्य सुरक्षा पर विमर्श के साथ मना गांधीजी का शहादत दिवस

    नई दिल्ली, 30 जनवरी, 2012: महात्मा गांधी की शहादत दिवस पर, दिल्लीवासी, दिल्ली हाट में इकट्ठे हुए और स्वराज के दर्शन और सुरक्षित भोजन पर चिंतन किया।आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलों के बारे में बढ़ती अशांति के बाद और विवादास्पद जैव प्रौद्योगिकी नियामक प्राधिकार विधेयक (बीआरएआई बिल ) के मुद्दों पर एक नुक्‍कड़ नाटक मंचित किया। इसमें दिखाया गया कि बीआरएआई बिल संसद में इस सत्र में आता है तो जीएम फसलों के हमारे उपर क्‍या खतरनाक प्रभाव होंगे।

    इस मौके पर प्रख्यात खाद्य कार्यकर्ता, बीज बचाओ आंदोलन से अजय महाजन ने केंद्र मंच लेते हुए चिंतित नागरिकों के साथ सुरक्षित भोजन के मुद्दे पर चर्चा की। उन्‍होने कहा कि “बीआरएआई बिल गांधीवाद और स्वराज आंदोलन के खिलाफ है क्‍योंकि इस बिल के सांसद में पारित होने से विदेशी बायोटेक कंपनियों के हमारे स्थानीय कृषि पर एक एकाधिकार लाभ मिलेगा।“

    ग्रीनपीस का मानना ​​है कि देश की खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता की रक्षा के लिए, सरकार को जैव प्रौद्योगिकी नियामक प्राधिकार विधेयक (बीआरएआई बिल ) 2011 की पेशकश पर रोक लगाना चाहिए। यह बिल भारत में टिकाऊ, पारिस्थितिक कृषि को बढ़ावा देने के बजाय जीएम फसलों के लिए एक एकल खिड़की मंजूरी का रास्‍ता होगा।

    regards,
    Pari Trivedi
    Media Officer | Greenpeace India
    Mobile:+91 750 389 3981 | Skype: parie.trivedi


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